চদরিয়া ঝীনী রে ঝীনী | चदरिया झीनी रे झीनी | Chadariya Jhini Re Jhini | Key Lyrics

চদরিয়া ঝীনী রে ঝীনী
चदरिया झीनी रे झीनी
Chadariya Jhini Re Jhini
ভজন (भजन)
গীতিকার: কবির দাস (Saint Kabir Das)
শিল্পী: অনুপ জালোটা (अनूप जलोटा)
[কাবীরা জাব হাম প্যয়দা হুএ
জাগ হাঁসে হাম রোয়ে]-২
এ্যায়সী কারনী কার চলো
হাম হাঁসে,জাগ রোয়ে
চদরিয়া চদরিয়া ঝীনী রে ঝীনী
ঝীনী রে ঝীনী
[কে রাম নাম রস ভীনী
চদরিয়া ঝীনী রে ঝীনী]-২
[অষ্ট-কমল কা চরখা বানায়া]-২
পাঁচ তত্ত্ব কী পূনী
অষ্ট-কমল কা চরখা বানায়া
পাঁচ তত্ব কী পূনী
[নও-দস মাস বুনন কো লাগে]-২
মূরখ ম্যয়লী কিন্হী
চদরিয়া ঝীনী রে ঝীনী
কে রাম নাম রস ভীনী
চদরিয়া ঝীনী রে ঝীনী
[জব মোরী চাদর বন ঘর আই,
রঙ্গরেজ কো দীন্হী]-২
[এ্যায়সা রঙ্গ রঙ্গা রঙ্গরে নে]-২
কে লালো লাল কর দীন্হী
চদরিয়া ঝীনী রে ঝীনী
কে রাম নাম রস ভীনী
চদরিয়া ঝীনী রে ঝীনী
[চাদর ওঢ় শঙ্কা মত কারিয়ো]-২
ইয়ে দো দিন তুমকো দীন্হি
চদরিয়া ইয়ে দো দিন তুমকো দীন্হি
[মূরাখ লোগ ভেদ নেহীঁ জানে]-২
দিন-দিন ম্যয়েলী কীন্হি
চদরিয়া ঝীনী রে ঝীনী
[কে রাম নাম রস ভীনী
চদরিয়া ঝীনী রে ঝীনী]-২
ধ্রুব-প্রহলাদ সুদামা নে ওঢ়ী চদরিয়া,
ধ্রুব-প্রহলাদ সুদামা নে ওঢ়ী
শুকদেব মেঁ নির্মল কীন্হি চদরিয়া
শুকদেব মেঁ নির্মল কীন্হি
[দাস কবীর নে এ্যায়সী ওঢ়ী]-২
জিঁউ কী তিউঁ ধার দীন্হি
চদরিয়া ঝীনী রে ঝীনী
কে রাম নাম রস ভীনী
চদরিয়া ঝীনী রে ঝীনী
রাম নাম রস ভীনী
চদরিয়া ঝীনী রে ঝীনী
…………………………………………………………………………
[कबीरा जब हम पैदा हुए,
जग हँसे,हम रोये]-x२
ऐसी करनी कर चलो,
हम हँसे,जग रोये
चदरिया चदरिया झीनी रे झीनी
झीनी रे झीनी
[के राम नाम रस भीनी
चदरिया झीनी रे झीनी]-x२
[अष्ट-कमल का चरखा बनाया]-x२
पांच तत्व की पूनी
अष्ट-कमल का चरखा बनाया
पांच तत्व की पूनी
[नौ-दस मास बुनन को लागे]-x२
मूरख मैली किन्ही
चदरिया झीनी रे झीनी
के राम नाम रस भीनी,
चदरिया झीनी रे झीनी।
[जब मोरी चादर बन घर आई,
रंगरेज को दीन्हि]-x२
[ऐसा रंग रंगा रंगरे ने]-x२
के लालो लाल कर दीन्हि
चदरिया झीनी रे झीनी
के राम नाम रस भीनी,
चदरिया झीनी रे झीनी।
[चादर ओढ़ शंका मत करियो]-x२
ये दो दिन तुमको दीन्हि
चदरिया ये दो दिन तुमको दीन्हि
[मूरख लोग भेद नहीं जाने]-x२
दिन-दिन मैली कीन्हि
चदरिया झीनी रे झीनी
[के राम नाम रस भीनी,
चदरिया झीनी रे झीनी]-x२
ध्रुव-प्रह्लाद सुदामा ने ओढ़ी चदरिया,
ध्रुव-प्रह्लाद सुदामा ने ओढ़ी
शुकदेव में निर्मल कीन्हि चदरिया
शुकदेव में निर्मल कीन्हि
[दास कबीर ने ऐसी ओढ़ी]-x२
ज्यूँ की त्यूं धर दीन्हि
चदरिया झीनी रे झीनी
के राम नाम रस भीनी,
चदरिया झीनी रे झीनी
राम नाम रस भीनी,
चदरिया झीनी रे झीनी

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